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Delhi: मनीष सिसोदिया आज पेश करेंगे चौथा बजट, सड़क पर उतरेंगी 1 हजार इलेक्ट्रिक बसें, शिक्षा का बजट बढ़कर 53 हजार करोड़


उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया दिल्ली विधानसभा में आगामी वित्त वर्ष का बजट पेश कर रहे हैं, इसके तहत पर्यावरण को खास तौर पर ध्यान में रखा गया है। इसमें दिल्ली की बेहतरी के लिए तय की गई प्राथमिकताएं बताने के साथ आय के स्रोत भी बताए जा रहा है।

नई दिल्ली [ जेएनएन ]। आज केजरीवाल सरकार वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया दोपहर 12 बजे दिल्ली विधानसभा में बजट पेश करेंगे। दिल्‍ली सरकार इस बजट में पर्यावरण को लेकर कुछ बड़े ऐलान कर सकती है।

पढ़ें बजट की बड़ी बातें-
- मनीष सिसोदिया ने बजट पेश करने के दौरान एक बड़ी घोषणा की है जिसके तहत सरकार डीजल जनरेटर से इलेक्ट्रिक जनरेटर पर स्विच करने वाले लोगों के लिए 30 हजार करोड़ का बजट रखा गया है।
- 1000 इलेक्ट्रिक बसें भी चलाएगी सरकार।
-अगर लोग अपने छतों पर सोलर पैनल लगाते हैं तो दिल्ली सरकार उनसे ये बिजली खरीदेगी।
-स्वास्थ्य और पर्यावरण पर काम कर रहे हैं!
-प्रस्तावित बजट 53 हजार करोड़ रुपए का है. इसका 13 फीसदी स्थानीय निकायों को दिया जाएगा.-पिछले 3 साल में बजट 30,900 करोड़ से बढ़कर 53,000 करोड़ तक पहुंचा.-निगम की टूटी सड़कों को ठीक करने के लिए 1,000 करोड़ का बजट अलग से दिया जाएगा.

-दिल्ली में 1,000 इलेक्ट्रिक बस सरकार लाएगी. चीन के बाद इलेक्ट्रिक बसों का यह सबसे बड़ा बेड़ा होगा.
-मेट्रो स्टेशन के पास 905 इलेक्ट्रिक फीडर बस भी जोड़ी जाएंगी.
-ई-रिक्शा चालकों को सब्सिडी दी जाएगी.
-दुपहिया वाहनों के लिए पॉलिसी बनानी होगी.
-सरकार टैक्सी पर भी फोकस कर रही है जो पूरे दिन शहर में प्रदूषण बढ़ाती है.
-बुराड़ी, सराएं काले खान और द्वारका में नए ब्रिज बनाए जाएंगे.
- बिजली के लिए 2190 करोड़ का प्रावधान
- बिजली पर छूट के लिए 1720 करोड़
- पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 16 किमी के साइकिल ट्रैक के ऊपर सोलर पैनल लगेंगे
- पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ऐसा अभियान चलाने की जरूरत है, केंद्र सरकार पहल करे
-  दिल्ली में सरकार कृषि सह सोलर फार्म स्कीम लाएगी
-बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन- आम आदमी पार्टी बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दुनिया भर के अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी-योजना कागजों में ही।
उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली सरकार का फोकस एजुकेशन, हेल्थ, बिजली, परिवहन, मैट्रो और प्रदूषण पर होगा। परिणाम बजट 2018 यह दर्शाता है कि बिजली पर सबसिडी का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस योजना का लाभ 82 फीसदी घरेलू उपभोक्ताओं को हुआ है।
यह है आउटकम बजट
सरकार का काम सिर्फ यह नहीं है कि तय अवधि में उसने कितना पैसा खर्च किया, उसे यह भी देखना चाहिए कि लोगों को उससे फायदा हुआ या नहीं। अगर किसी अस्पताल में दस करोड़ रुपये खर्च करके कोई स्कैनिंग मशीन लगाई जाती है तो सरकार के रिकॉर्ड में तो दस करोड़ रुपये खर्च हो गए, भले ही उस मशीन से एक भी मरीज का टेस्ट न हुआ हो, लेकिन आउटकम बजट में हर तिमाही यह आंकड़ा जुटाया जाता है कि कितने लोगों को फायदा हुआ। मसलन, जौनापुर में वल्र्ड क्लास स्किल सेंटर बनाने की योजना है, आउटकम बजट में शिक्षा विभाग को बताना होगा कि इनसे कितने बच्चों को ट्रेनिंग मिली, कितनों को नौकरी।

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